डोर वेल का रहस्य | Hindi Kahani | Moral Story in hindi
![]() |
| Moral stories hindi |
रविवार की दोपहर थी। बाहर हल्की बारिश हो रही थी और घर के भीतर एसी की ठंडी हवा चल रही थी। आदित्य लंच करके ड्रॉइंग रूम के सोफे पर आराम से बैठा मोबाइल चला रहा था। उसकी पत्नी और बच्चे मॉल गए हुए थे, इसलिए घर में वह बिल्कुल अकेला था।
तभी डोरबेल बजी।
आदित्य ने दीवार पर लगी स्क्रीन में देखा। गेट के बाहर लगभग पच्चीस-छब्बीस साल का एक युवक और एक युवती खड़े थे। दोनों सभ्य और पढ़े-लिखे परिवार के लग रहे थे।
उसने दरवाज़ा खोल दिया।
"जी कहिए?" उसने पूछा।
युवक थोड़ा संकोच से बोला,
"सर, हमें माफ़ कीजिएगा। मेरी बहन की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उसे तुरंत वॉशरूम जाना है। आसपास कोई सुविधा नहीं मिली, इसलिए आपकी मदद मांग रहे हैं।"
युवती का चेहरा असहज लग रहा था।
आदित्य ने बिना ज्यादा सोचे उन्हें अंदर आने दिया और वॉशरूम का रास्ता दिखा दिया।
युवती अंदर चली गई जबकि युवक सोफे पर बैठ गया।
करीब दो मिनट बाद वॉशरूम का दरवाज़ा खुला।
लेकिन अगले ही पल आदित्य के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
युवती के हाथ में पिस्तौल थी।
उसने सीधे आदित्य की तरफ़ निशाना साध दिया।
"जहाँ हो, वहीं खड़े रहो।"
युवक की आवाज़ अचानक बदल गई।
"घर में जो भी नकदी, गहने या कीमती सामान है, निकाल दो। कोई चालाकी की तो अच्छा नहीं होगा।"
आदित्य का गला सूख गया।
उसके हाथ काँपने लगे।
"देखो... जो चाहिए ले लो... बस गोली मत चलाना।"
"पहले गले की चेन उतारो।"
आदित्य ने तुरंत चेन उतारकर मेज़ पर रख दी।
"अब तिजोरी खोलो।"
आदित्य धीरे-धीरे उठने लगा।
तभी अचानक युवक हँस पड़ा।
"सर, बैठ जाइए। हमें आपकी चेन नहीं चाहिए।"
आदित्य हैरान रह गया।
"क्या मतलब?"
युवती ने भी पिस्तौल नीचे कर ली।
फिर उसने हथियार मेज़ पर रख दिया।
"सर, यह नकली पिस्तौल है।"
कुछ क्षण के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।
आदित्य समझ ही नहीं पा रहा था कि आखिर हो क्या रहा है।
युवक ने अपने बैग से एक छोटा उपकरण निकाला।
"सर, हम एक होम सिक्योरिटी कंपनी में काम करते हैं।"
"क्या?"
"जी। और अभी जो हुआ, वही हमारा लाइव डेमो था।"
आदित्य की आँखें फैल गईं।
युवक बोला,
"आप पढ़े-लिखे और समझदार इंसान हैं। फिर भी दो अनजान लोगों को बिना किसी पहचान के घर के अंदर आने दिया। अगर हम सचमुच अपराधी होते तो?"
आदित्य के पास कोई जवाब नहीं था।
"सर, हमारी कंपनी ने एक स्मार्ट सिक्योरिटी सेंसर बनाया है। यह किसी भी धातु वाली संदिग्ध वस्तु को दरवाज़े के पास आते ही पहचान लेता है और अलार्म बजा देता है।"
युवती मुस्कुराते हुए बोली,
"आज आपने सिर्फ़ डर महसूस किया है। असली अपराधी होते तो शायद मौका भी नहीं मिलता।"
आदित्य अब तक सदमे में था।
उसका गुस्सा भी बढ़ रहा था और बात समझ भी आ रही थी।
"मतलब... तुम लोगों ने मुझे डराकर यह सब सिर्फ़ प्रोडक्ट बेचने के लिए किया?"
युवक थोड़ा झेंप गया।
"सर, तरीका थोड़ा अलग है... लेकिन संदेश ज़रूरी है।"
आदित्य कुछ सेकंड तक उन्हें घूरता रहा।
फिर बोला, "सच बताऊँ?"
"जी?"
"अभी भी समझ नहीं पा रहा हूँ कि तुम्हारी तारीफ़ करूँ, पुलिस बुलाऊँ या खुद को मूर्ख घोषित कर दूँ।"
दोनों हँस पड़े।
युवती बोली, "सर, कम से कम आज के बाद किसी अजनबी को सीधे घर के अंदर नहीं बुलाएँगे।"
आदित्य ने गहरी साँस ली।
"ये बात तो सही है।"
कुछ देर बाद दोनों चले गए।
दरवाज़ा बंद करके आदित्य वापस सोफे पर बैठ गया।
उसने सीसीटीवी स्क्रीन की ओर देखा और खुद ही मुस्कुरा दिया।
आज उसे एक बात समझ आ गई थी—
दुनिया में अच्छे लोग भी होते हैं और बुरे लोग भी। फर्क सिर्फ़ इतना है कि अच्छे लोग भरोसा करते हैं, जबकि समझदार लोग भरोसा करने से पहले सावधानी बरतते हैं।

0 Comments