एक किताब की तलाश - Hindi Kahani | Moral Story in hindi
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बरसों पुराने कस्बे में सेठ हरिनारायण का बड़ा-सा घर था। धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनकी सबसे बड़ी आदत थी—किताबें पढ़ना। घर के एक कमरे को उन्होंने छोटी-सी लाइब्रेरी बना रखा था, जहाँ सैकड़ों किताबें सजी रहती थीं।
घर में काम करने वाली गीता पिछले पाँच वर्षों से उनके यहाँ काम कर रही थी। वह मेहनती, ईमानदार और समझदार लड़की थी। सेठ जी उसे अपनी बेटी की तरह मानते थे।
एक दिन सेठ जी ने गीता को बुलाया।
"गीता, बाजार जाओ और मेरे लिए एक अच्छी किताब ले आओ।"
गीता थोड़ी असमंजस में पड़ गई।
"मालिक, किताब तो ले आऊँगी, लेकिन कैसी किताब? मुझे तो किताबों की ज्यादा समझ नहीं है।"
सेठ जी हँस पड़े।
"अरे, कोई भी अच्छी किताब ले आना।"
गीता बाजार पहुँची। वहाँ एक बड़ी पुस्तक दुकान थी। दुकानदार ने उसे कई किताबें दिखाईं—उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ और जीवनियाँ।
लेकिन गीता उलझ गई।
उसे लगा कि अगर वह अपनी पसंद से कोई किताब ले आई और सेठ जी को पसंद नहीं आई तो?
आखिर वह खाली हाथ वापस लौट आई।
"क्या हुआ?" सेठ जी ने पूछा।
गीता ने संकोच से कहा, "मालिक, किताबें बहुत थीं, लेकिन मुझे आपकी पसंद नहीं पता। मैंने सोचा बिना समझे कुछ भी खरीदना ठीक नहीं होगा।"
सेठ जी कुछ पल उसे देखते रहे। फिर मुस्कुराकर बोले,
"तुमने बहुत समझदारी दिखाई। अक्सर लोग बिना सोचे फैसला कर लेते हैं, लेकिन तुमने जिम्मेदारी समझी।"
उन्होंने अपनी अलमारी से एक पुरानी किताब निकाली।
"मुझे ऐसी किताब चाहिए जो इंसान को बेहतर बनना सिखाए।"
गीता ने किताब का नाम याद कर लिया और अगले दिन वही किताब खरीद लाई।
जब उसने किताब सेठ जी को दी, तो उनकी आँखों में खुशी झलक उठी।
"शाबाश गीता। तुमने सिर्फ किताब नहीं खरीदी, बल्कि यह साबित किया कि किसी भी काम को ईमानदारी और सोच-समझकर करना कितना जरूरी होता है।"
गीता मुस्कुरा दी।
उस दिन उसे एहसास हुआ कि बड़े काम हमेशा बड़े लोगों से नहीं होते। कभी-कभी छोटी-सी जिम्मेदारी भी इंसान के चरित्र को पहचान दिला देती है।
उसके बाद सेठ जी जब भी नई किताब खरीदते, गीता से उसकी राय जरूर पूछते। और धीरे-धीरे गीता को भी किताबों से लगाव होने लगा।
कुछ साल बाद वही गीता, जो कभी किताबों के नाम तक नहीं जानती थी, कस्बे की लाइब्रेरी में बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करने लगी।
सीख:
किसी भी काम की सफलता केवल मेहनत में नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी में छिपी होती है। ईमानदारी से किया गया छोटा-सा कार्य भी जीवन बदल सकता है।

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