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हिंदी कहानी - कुसुम - एक अनसुलझी पहेली (भाग - २३)


 हिंदी कहानी - कुसुम - एक अनसुलझी पहेली (भाग - २३)


नोट - कहानी के सभी भाग पढ़ने पर ही सही से समझ आएगी 


अब तक अपने पढ़ा की शीतल रोहित से मिलने उसके शहर आ चुकी थी , जैसे तैसे उसे रोहित ने घर आने से रोका , और फिर शीतल के कहने पर होटल में उससे मिलने के लिए निकल गया था , अब आगे |




रोहित ने अपनी बाइक स्टार्ट की और घर से निकल गया था , वो रास्ते में ही था की उसे एक बार फिर से शीतल का कॉल आया ,

शीतल - हेलो रोहित , कहाँ तक पहुंचे ?

रोहित - यार तुम इतना क्यों परेशान हो रही हो , मैं घर से निकल गया हूँ , आधे घंटे में तुम्हारे पास आ जाउगा 

शीतल - वो क्या है की अब तुम्हारा और इंतजार हमसे हो नहीं रहा है इसलिए |

रोहित - तुम कॉल रखो मैं आता हूँ |

रोहित ने फिर से अपनी बाइक की स्पीड बढ़ाई और लगातार चलता रहा , लेकिन उससे भी ज्यादा स्पीड से उसके दिमाग में अलग अलग तरह के विचार आ रहे थे , क्युकी अब वो दो दो लड़कियों के चक्कर में पड़ चुका था , और सबसे ज्यादा दिक्कत की बात ये थी की उसकी वजह से दोनों ही प्रेग्नेंट हो चुकी थी , अब वो समझ नहीं पा रहा था की किसका साथ दे , एक तरफ तेज तर्रार शहरी लगकी शीतल थी , तो दूसरी और सीधी साधी नजाकत से भरी हुयी कुसुम , 

अगर कुसुम का साथ देने से इंकार करता है तो शायद कुसुम ये सदमा बर्दास्त न कर पाए आवर कही कोई गलत कदम न उठा ले , वही दूसरी तरफ तेज तर्रार शीतल जो की पहले ही पुलिस की धमकी दे चुकी थी |

इसी सोच विचार के साथ रोहित दिए हुए एड्रेस पर पहुंच गया |


अपनी बाइक पार्क करने के बाद उसने शीतल को कॉल किया ,

हेलो शीतल , मैं तुम्हारे होटल के बाहर खड़ा हूँ 

शीतल - ओह्ह वैरी नाइस , रुको मैं आयी , तुम्हे पिक करने 


रोहित नीचे रिसेप्शन पर जा कर बैठ जाता है , थोड़ी देर में शीतल ऊपर उतरती हुई दिखाई दी , पास आने पर शीतल ने रोहित को गले लगाया और थोड़ी देर यू ही खड़ी रही , फिर उसने कहा - रोहित चलो कमरे में चलते है |


अब रोहित और शीतल दोनों शीतल के रूम में पहुंचे जहा शीतल ठहरी हुयी थी ,

रूम में पहुंच कर शीतल ने रोहित का हाथ पकड़ा और उसे गले लगाया और फिर किश करने के बाद उसका हाथ पकड़ कर बेड पर बैठ गयी , बहुत देर बैठे रहने के बाद उसने कहा - क्या हुआ रोहित , बात क्यों नहीं कर रहे हो ?


रोहित अभी भी चुप बैठा था , अब शीतल ने रोहित का हाथ अपने पेट पर रखते हुए मजाक करते हुए कहा - रोहित देखो अपना बेबी तुम्हे आवाज दे रहा है |


रोहित अभी मजाक के मूड में नहीं था , उसने अपना हाथ छुड़ाया और कहा शीतल यार प्लीज ....

शीतल ने चौकते हुए कहा - यार रोहित तुम अभी भी मजाक समझ रहे हो ??

रोहित ने कहा - नहीं यार आज कल तो मैं खुद ही मजाक बना हुआ हूँ 

शीतल - मतलब मैं कुछ समझी नहीं 

रोहित - यार पापा की तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है , और उन्होंने मेरे लिए अपनी पसंद की लड़की देख ली है  

शीतल ने कहा - रोहित तुमने क्या सोचा है |

रोहित ने कहा - मैंने अभी उन्हें कुछ नहीं बोला है 

शीतल - अगर बोलना पड़े तो क्या बोलोगे |

रोहित ने कुछ नहीं कहा और सामने टेबल पर रखी वाइन की बोतल से दो पैग बनाये , एक शीतल के सामने करते हुए कहा - शीतल यार मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ , ये सब हुआ कैसे और कब ?

शीतल ने वाइन का गिलास लेते हुए कहा - आज मैं तुम्हे सब याद दिला दूंगी और एक बार में ही वाइन का गिलास खाली कर दिया |

रोहित ने भी अपना ग्लास खाली करते हुए एक और पैग के लिए पूछा तो शीतल ने हाँ कहा |

इसबार रोहित ने थोड़ा ज्यादा बड़ा पैग बनाया और दोनों ने एक साथ गटक लिया , 

अब दोनों को नशा होने लगा था , बाते करते करते , दो पैग और भी बना लिए गए 

शीतल ने रोहित को अब रुकने के लिए कहा लेकिन रोहित ने दो पैग और पी लिए थे , अब रोहित नशे में आ चुका था |

शीतल ने रोहित को पकड़ के उसको बेड पर लिटाया और उसके शूज उतरने लगी |

शीतल ने फ्रेश हो कर जब आयी तो देखा रोहित तो घोड़े बेच कर सो चुका था , 

उसने रोहित को जगाने की कोशिस की लेकिन वो नहीं उठ रहा था , शीतल ने सोचा फिर इसे यहां बुलाने का क्या फायदा हुआ ये तो बस पी कर सोने आया था क्या ?? इसने खाना भी नहीं खाया 

 ये सोचते हुए शीतल भी रोहित के पास आ कर लेट गयी , नशे की हालत होने की बजह से उसकी भी कब आँख लग गयी पता ही नहीं चला 


रोहित की आंख तब खुली जब उसने अपने ऊपर किसी को फील किया , उसने महसूस किया की उसके होठ किसी के होठो के बीच में है , उसने अपने आंखे खोली तो शीतल उसके ऊपर थी और उसे बेहाशे चूमे जा रही थी 

रोहित शीतल को अलग करना चाह रहा था लेकिन शीतल की पकड़ ज्यादा मजबूत थी , वो उससे अलग नहीं हुयी , शीतल का इरादा बिलकुल भी नेक नहीं लग रहा था , अब रोहित भी शांत लेता रहा , शायद अब उसे भी इस सब में अच्छा लगने लगा था |

अगले ही पल जब रोहित ने अपने हाथ शीतल के ऊपर रखे तो उसने महसूस किया की शीतल के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं है उसने अपना हाथ रखा तो उसकी पीठ बिलकुल ही नग्न थी , उसने पीठ से लेकर उसके नितम्ब तक के एरिया का माप लिया तो वहां तक बिना किसी बस्त्र के पाया , शीतल को भी अब भरोषा हो चुका था की रोहित अब जाग चुका है और उसका साथ देने के लिए तैयार भी है |


अगले ही पल रोहित के होठ स्वतंत्र फील किया तो रोहित को बोलने का मौका मिला तो उसने कहा - शीतल अभी ये सब करना ठीक नहीं है , 

शीतल अपना मन बना चुकी थी , वो किसी भी तरह का विलम्ब या रुकाबट नहीं चाहती थी , उसने फिर से बिना मौका दिए रोहित को अपने ऊपर आने को मजबूर करने लगी , आखिर रोहित भी तो एक मर्द था तो उसे उसने भी बिना देरी किये , शीतल की मंसा को भाप लिया था , साथ ही साथ वो ये भी जनता था की शीतल एक जिद्दी लड़की है अब वो मानेगी नहीं तो क्यों बेकार में मूड ख़राब किया जाये ......



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