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Suvichar Hindi | Moral Story For Students | पापा का स्वेटर

 Suvichar Hindi | Moral Story For Students | पापा का स्वेटर 

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Suvichar Hindi Story | सुविचार हिंदी कहानी 

" बाहर ठण्ड कितनी है ?? " लगभग मुँह से ठण्ड के कारण सीटी बजाते हुए गोपाल ने अपनी पत्नी रामा को कहा !! " हाँ इस बार ठण्ड ने तो सरे रिकार्ड्स तोड़ने का ठान लिया है , देखो न कितनी बर्फ गिर रही है " रामा ने भी कपकपाती आवाज में अपने पति की बात का समर्थन किया ||

गोपाल ने अपना ओवर कोट उतारा और हैंगर पर टांगते हुए वीबी से कम्बल माँगा और सीधा बिस्तर में चला गया | 

रामा ने गोपाल को खाने की प्लेट देते हुए कहा " बहुत अच्छा किया जो हमने इस बार समय रहते बच्चो के गर्म कपडे खरीद लिए , न तो आपको इतना टाइम होता है और न ही पैसा , हर महीने तो कुछ न कुछ ऐसा सामने आ धमकता है जिसकी बजह से अपने लिए कुछ सोचने से पहले ही मन मारना पड़ता है "

गोपाल ने एक निवाला मुँह में दिया और कहा " हाँ सही ही तो कह रही हो तुम , अब इसी महीने देख लो , माँ जी के चश्मे का नंबर बदलवाना था और बाउजी के लिए भी तो कुछ गरम कपडे और सॉल खरीदनी थी , पर ...." निवाला चवाते चवाते अचानक से गोपाल को ठण्ड का अहसास होने लगता है !!

" यार गोपाल तू कितना सेल्फिश है तूने अपने और बच्चो सहित रामा के लिए तो एक नहीं दो दो जोड़े गरम कपडे बनवा लिए पर ऐसी हड्डी गला देने बाली ठण्ड में न बाबू जी के लिए कुछ भी नहीं खरीदा जबकि पिछली शर्दियो में ही बाबू जी ने अपने लिए एक गरम सॉल लेने की इच्छा जाहिर की थी | 

गोपाल ने जल्दी से खाना ख़तम किया और अभी बाबू जी के नाम के पैसे अभी अलग करने के इरादे से अपने पेन्ट की जेब से बटुआ निकाल कर चेक करने लगा || तभी किचन में बर्तन साफ़ कर रही रामा ने बिना उसकी ओर देखे ही कहा " क्या चेक कर रहे हो मैंने आपकी जेब से पैसे निकाले है , वो मुन्नी की फीस पिछले पांच महीने से जमा नहीं हुई है , ऊपर से उसकी ट्युसन बाली मेडम ने उसे अब पढ़ाने से मना कर दिया है क्युकी वे अब फीस बढ़ा के मांग रही है और हम दे नहीं पा रहे है | "

" हम्म्म ..पर रामा बाबू जी को ठण्ड ....." गोपाल ने अपनी बात पूरी भी नहीं कही थी की रामा ने बर्तन सिंक में जोर से मारते हुए कहा " आज कल कम पढ़ी लिखी लड़कियों के रिश्ते भी नहीं होते है "

बेबश गोपाल ने एक नजर भर के रामा की ओर देखा और फिर कमरे से बाहर निकल कर बाबू जी और माता जी के कमरे में पहुंचा !! 

" अरे गोपाल बेटा , आ गए तुम ? हमें चिंता हो रही थी आज बाहर बहुत ठण्ड है " गोपाल के पापा ने चिंता करते हुए पूछा |

" हाँ बाबू जी आज बहुत ठण्ड है " कहते हुए गोपाल माँ के पास कम्बल में बैठ कर उनसे बाते करने लगता है | तभी गोपाल की नजर पापा की साल पर गयी , उसमे दो तीन छेद जो पहले छोटे हुआ करते थे अब वो अपना अकार बड़ा कर चुके थे , अब बे दूर से साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे || पापा की सॉल की ये हालत देख कर गोपाल सोच ही रहा था की तभी उसे नजर आया उसके पापा कांप रहे है " क्या हुआ पापा जी अपने अंदर गर्म कपडे नहीं पहने है क्या आप कांप रहे है ?? "

अब गोपाल के पापा और माँ दोनों एक साथ गोपाल की ओर देखने लगते है , वो खुद गोपाल से कुछ कहना नहीं चाहते थे " नहीं .. नहीं . वो आज ठण्ड ज्यादा है न इसलिए शरीर कांप रहा है ... " गोपाल की और पापा बाते करते रहे लेकिन गोपाल का ध्यान अब अपनी पतली हालत पर था , मैं अपनी कमाई का एक हिस्सा बचा कर इन लोगो के लिए अच्छे और गरम कपडे तक नहीं खरीद पा रहा हूँ !!

अगली सुबह जब गोपाल अपने दफ्तर के लिए जा रहा था तो उसने देखा उसकी गली का अंतिम घर जो की शुक्ला जी का है , उनके घर के आगे भीड़ जमा हो रही है !! जाते हुए उसने वहां पर जा कर पूछ दिया " क्या हुआ भाई ,... "

तभी उसे सुनने को मिला .... " ठण्ड में अकड़ने की बजह से शुक्ल जी की मौत हो गयी !! " 

ये खबर सुन कर मानो गोपाल मानो सुन्न सा हो गया हो , उसके मुँह से कुछ भी नहीं निकला .. वो खड़ा खड़ा काफी देर तक सोचता रहा , और फिर क्रिया करम के बाद अपनी ऑफिस गया !!

पूरे दिन काम और फिर बापस आते वक्त उसने फैसला किया की वो बाकी जरूरतों को दरकिनार कर के वो पहले माँ और बाबूजी के लिए गरम कपडे खरीदेगा नहीं तो ....

जब वो घर आया तो उसके हाथ में देर सारे कपडे थे , रामा ने देखा की गोपाल ने न तो मुन्नी की फीस भरी है और न ही गुल्लक में पैसे डाले है !! उसने गेट खोला और बिना कुछ कहे आंखे तरेरते हुए अंदर चली गई !!

कुछ देर गोपाल खड़ा सोचता रहा फिर वो सीधा अपने पापा के कमरे में गया , और अपने हाथो से अपनी माँ और पापा को वो गरम कपडे जो लेके आया था पहनाने लगा || 

" हाँ .. आज कितना अच्छा लग रहा है .. ऐसा लग रहा है जैसे ठण्ड है ही नहीं || " गोपाल के पापा ने अपनी बूढी और जर्जर आँखों में चमक लाते हुए कहा | गोपाल ख़ुशी से उनकी ओर देख रहा था , तभी उन्होंने कहा " मैं दो दिन पहले शुक्ल जी से मिला था , कह रहे थे लगता है इस बार ठण्ड हमें लेके ही जायेगी , कमबख्त सही कह रहा था " 

गोपाल अपने कमरे में आता है तो रामा गुस्से में खड़ी उसे देख रही थी , गोपाल को बजह पहले से ही पता थी , इसलिए उसने कहा " रामा पता है हम इंसान बच्चे पैदा क्यों करते है " गोपाल ने रामा की ओर घूर के देखा 

गोपाल - " केबल इसलिए ही नहीं की वो हमारा वंश आगे बढ़ाएंगे , इसलिए भी जब हम बूढ़े होंगे , हमारे हाथ पैर थकेंगे तब हमे उनसे उम्मीद रहेगी की वे हमें हमारी जरूरतों को पूरा करेंगे , और मैंने भी वही किया है "

तभी गोपाल अपने बचपन का एक किस्सा सुनने लग जाता है कैसे उसकी जिद करने पर पापा ने अपने लिए जूते न लेकर उसके लिए नया कोट लिया था ... अब रामा समझ गयी थी ||





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