राज कुमारी और नागराज का रहस्य - Hindi Kahani | Moral Story in hindi | Story Hindi Me
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वह राजमहल बाहर से बहुत खुशनुमा और भव्य दिखाई देता था लेकिन उसकी कंदराओं में एक अनोखा राज् छिपा हुआ था,,
क्योंकि राजमहल में हर रात जैसे किसी अनदेखे डर की छाया मंडराने लगी थी।।
यह एक ऐसी छाया थी जिसके कारण महल की हंसी ठिठोली रुक सी गई थी।
और इस छाया का अभिप्राय राजकुमारी से था,राजकुमारी शुभांगी,
राजकुमारी, जो कभी हँसी की तरह हल्की ,,प्यारी और चाँदनी जैसी शांत थी,अब हर पल पीड़ा में डूबी रहती थी ।
उसके चेहरे का तेज दिन-ब-दिन कम होता जा रहा था।
जैसे ही राजा को इसकी हल्की सी भनक लगी राजा ने हर वह काम किए जिससे राजकुमारी ठीक हो जाए।
राजवैद्य, तांत्रिक, साधु—सब बुलाए गए… पर कोई भी उस रहस्य को समझ न पाया जो उस राजकुमारी की सांसों में छिपा था।
या ये कहे उसकी जिंदगी को खाक कर रहा था,,
ओर यह जो भी हो रहा था,,दिन के उजाले में न होकर रात के अंधेरे में होता था,,
रात होते ही महल की दीवारें सिहर उठतीं, अजीब सन्नाटे से गूंज उठती ।
क्योंकि आधी रात के सन्नाटे में,,,, जब पूरा महल
नींद की आगोश में चल जाता ,,तो राजकुमारी के पेट से होकर मुंह के मार्ग से एक काला नाग निकलता,धीरे धीरे सरकता हुआ वो नाग पीछे मुड़कर एक पल कुमारी की तरफ जरूर देखता।
उसकी आँखों में अजीब सी चमक होती, जैसे वह सिर्फ एक सर्प नहीं, कोई श्राप हो।
जिसे राजकुमारी कई बरसों से जी रही हो, और सुबह होने के पहले ही वह फिर से राजकुमारी के भीतर समा जाता,, उसे और कमजोर,बेबस और पीड़ित बना देता।।
राजकुमारी दिन प्रतिदिन सुस्त होती जा रही थी और उसके चेहरे का निखार बिल्कुल चला गया था ,,
अधिकतर वो निस्तेज रहती थी क्योंकि वह जो भी खाती थी ,,नाग निगल जाता है,,,
राजकुमारी अंदर से दुखी थी , पर अपनी वेदना किसी से व्यक्त नहीं कर पा रही थी।
राजकुमारी अब ना तो किसी के साथ हंसती थी और ना किसी से बात ही कर सकती थी।
वो भयभीत सी थी, और इन सबके कारण ही दिन-ब-दिन राजमहल में भय बढ़ता जा रहा था, क्योंकि राजकुमारी की हालत देखकर अब दासिया भी उससे दूर रहने लगी।
धीरे-धीरे राजकुमारी के बारे में चर्चाएं होने लगी और यह खबर महल से निकलकर शहर में पहुंच गई ।
अब तो धीरे-धीरे यह बातें आम होने लगी, की राजकुमारी बीमार है,, और, राजकुमारी का बचना नामुमकिन है।।
आख़िरकार, कुछ दिनों के बाद राजा ने एक कठोर फैसला लिया।
उन्होंने पूरे राज्य में घोषणा करवा दी—
“जो कोई भी इस नाग से राजकुमारी को मुक्त करेगा, उसे आधा राज्य और राजकुमारी का हाथ दिया जाएगा।”
यह सुनकर कई वीर, कई तांत्रिक और कई लालची लोग महल पहुँचे, पर जो भी उस कक्ष में गया,, वो राजकुमारी की हालत देखकर
निस्तेज हो गया,,
और उन्हें ये उम्मीद ही नहीं रही कि वह राजकुमारी को बचा सकते है,इसलिए वह वापस वैसे ही लौट गएं,,,
महल अब उम्मीद और डर के बीच झूल रहा था।
तभी, एक साधारण सा युवक महल के द्वार पर आया, क्योंकि उसने महाराज की यह शर्त सुन ली थी,,
साधारण सा उसका नैन नक्श, पर चेहरा शोभायमान,बस आँखों में अजीब सा आत्मविश्वास और चेहरे पर शांति बिखरी हुई थी।
उसने पहले महाराज को प्रणाम किया, प्रणाम करके उसने महाराज से एक विनती की मैं आपकी पुत्री को इस कष्ट से बाहर निकालने की कोशिश करूंगा ।
पर इसके लिए मेरी एक शर्त है ।
पूरी रात मुझे जाग कर इस कक्ष में पहरा देना होगा,,
पर याद रखिए कि जब मैं उस कक्ष में रहूंगा,,तब कोई उस कक्ष में कोई भी ना आए। ।
राजा ने उसकी ये शर्त मन ली,,ओर उसे राजकुमारी के कक्ष की ओर ले गया।
वह युवक दिन से रात तक उस कक्ष की निगरानी करता रहा,,
ओर आधी रात तक अपलक रूप से बस राजकुमारी को ही देखता रहा , पर अब वो समय आ चुका था,,जब उस दर्दनाक रहस्य का खुलासा होने वाला था,, क्योंकि यह मंजर,,, डरावना ही नहीं बल्कि खतरनाक भी था।
उसने देखा कि निर्जीव सी पड़ी राजकुमारी के मुंह से एक भयानक सांप निकलकर बाहर आया,
नाग बाहर निकला, फुफकारता हुआ,फुंफ, कारते हुए,ओर वो युवक बस उसे छिपकर देखता ही रहा, वो नाग खिड़कियों से होते हुए बाहर की ओर बढ़ा, ओर अंधेरे में जाकर उसका काला शरीर अंधेरे में विलिन हो गया ।
यह सब कुछ इतना भयानक था कि किसी की भी आंखें चौंधिया जाए, पर उस युवक ने डर से नहीं, बल्कि विनम्रता से काम किया और उस नाग के वापिस लौटने का इंतजार करने लगा।।
और सुबह होने के पहले उसने देखा कि ,,अब वो नाग वापस आकर राजकुमारी के शरीर में ,,फिर से उसके पेट से समा गया।।
राजकुमार ने देखा कि राजकुमारी दर्द से तड़फते हुए उठी,,
वो काफी डरी सहमी हुई थी,,
पर ये बात भी थी,, की राजकुमारी हमेशा की तरह ही दुखी होकर उठी,,
युवक ने यह बात तुरंत राजा को जाकर बताइ और राजा से कुछ चीजों की मांग की,,
पर उसने यह सच्चाई नहीं बताई थी कि राजकुमारी का शरीर एक नाग का घर है,,,
उसने जो भी सामान मंगाया था राजा ने वह सारा सामान जुटा दिया।
युवक एक बार फिर से रात में छिपकर नाग के निकलने की प्रतीक्षा करने लगा।
आधी रात का समय हो चुका था और जैसे ही नाग राजकुमारी के शरीर से बाहर निकला,,,राजकुमारी सिहर उठी,,नाग धीरे से राजकुमारी के शरीर से बाहर आया,,
युवक में एक क्षण भी देर नहीं की और दिव्य धार वाली तलवार सर्प के गले में दे मार दी,,अचानक हुए इस हमले से नाग दो टुकड़ों में कट गया,,
नाग दो टुकड़ों में कटकर ज़मीन पर तड़पने लगा।
पर बात यहीं खत्म नहीं हुई,,
कटे हुए दोनों हिस्से अभी भी हिल रहे थे,,।ऐसा लग रहा था कि नाग,,में अब भी जान बाकी हो…
ओर वह पुनर्जीवित हो जाएगा,,
इसके पश्चात उसने बिना देरी किए,,
उसे नाग को रस्सी से बांध लिया और एक बड़े से बर्तन में लेकर राजमहल से दूर ले जाकर एक घने जंगल के पास जला दिया, और एक बार फिर से महल में वापस आ गया।
वापस आकर वह फिर से राजकुमारी की इर्द-गिर्द पहरा देने लगा,, आज की सुबह जब राजकुमारी नींद से जागी, तक वह सुस्त नहीं थी वह एकदम खुश थी, जैसे वह कोई युद्ध जीत चुकी हो आज उसने चहकते हुए आंखें खोली, ऐसा लग रहा था जैसे वह कई सदियों के बाद आंखें खोल रही हो और कई वर्षों के बाद हंस रही हो।
तुरंत ही राजा को ये सूचना दी गई, आज युवक के साथ राजा भी पूरी रात जगे थे,,ओर परिणाम जानने को आतुर हो रहे थे,,
राजा में जब ये खबर सुनी तब वह दौड़ते हुए आए और उसने युवक को गले लगा लिया ।
महाराज ने युवक से इस बीमारी का कारण पूछा तो युवक ने कुछ भी नहीं बताया बस इतना कहा कि इन पर एक साया था जो चला गया,
राजा ने युवक को गले तो लगा लिय पर उनके मन में एक सवाल अब भी कांटे की तरह चुभ रहा था , की आखिर रहस्य क्या है??
उन्होंने शांत स्वर में कहा, तुमने मेरी बेटी को जीवन दिया है।
पर एक पिता होने के नाते… मुझे सच जानने का अधिकार है।”
युवक कुछ पल चुप रहा,, उसने राजकुमारी की ओर देखा—
जो अब खिड़की से आती धूप को ऐसे महसूस कर रही थी, जैसे पहली बार जी रही हो। राजा और युवक ने एक दूजे को देखा,ओर मुस्कुरा दिए ।

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